Action Plan : यमुना प्रदूषित करने पर सीधे होगी जेल, बंधवाड़ी के लिए नया मेगा प्लान तैयार
बंधवाड़ी में जमा पुराने (लीगेसी) कचरे के निस्तारण पर चेयरमैन ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कार्य आवंटन प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा।

Action Plan : यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने और बंधवाड़ी लैंडफिल साइट से लीगेसी कचरे के खात्मे के लिए हरियाणा सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। मंगलवार को गुरुग्राम के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) के चेयरमैन विनीत गर्ग की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में एनजीटी (NGT) के निर्देशों की पालना और यमुना एक्शन प्लान की प्रगति पर विस्तृत चर्चा हुई।
चेयरमैन विनीत गर्ग ने सीवर कचरे की अवैध डंपिंग पर कड़ा संज्ञान लिया। उन्होंने पुलिस और संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए कि गुरुग्राम के निगम क्षेत्रों में जो टैंकर संचालक चोरी-छिपे नालों या खुले स्थानों में कचरा डाल रहे हैं, उन पर केवल जुर्माना न लगाया जाए, बल्कि तत्काल FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने संवेदनशील इलाकों में सीसीटीवी और गश्त बढ़ाने के निर्देश भी दिए।

बैठक में गुरुग्राम की लेग-1, लेग-2 और लेग-3 ड्रेनों के साथ-साथ झज्जर की ड्रेन संख्या-8 को प्रदूषण मुक्त करने की रणनीति साझा की गई। लेग-1: वर्तमान में 55.4 MLD अनुपचारित पानी बह रहा है, जिसके शोधन के लिए नए STP स्थापित किए जा रहे हैं।
लेग-2: धनवापुर में 100 MLD क्षमता का नया STP प्रस्तावित है। 17 ड्रेनेज पॉइंट की पहचान की गई है जिन्हें चरणबद्ध तरीके से टैप किया जाएगा। लेग-3: यहाँ 2026 तक सभी 11 निकास बिंदुओं को टैप करने का लक्ष्य है। धनवापुर में 240 MLD के तीन नए STP और औद्योगिक कचरे के लिए 30.5 MLD के तीन नए CETP प्रस्तावित हैं।
बंधवाड़ी में जमा पुराने (लीगेसी) कचरे के निस्तारण पर चेयरमैन ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कार्य आवंटन प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा। उन्होंने लीचेट ट्रीटमेंट के लिए DTRO प्लांट की स्थापना को प्राथमिकता देने और घर-घर से कचरा संग्रहण (Door-to-Door Collection) के दौरान कचरे को अलग-अलग (Segregation) करने पर जोर दिया।
नदियों में हवन सामग्री, फूल और कपड़े प्रवाहित करने से रोकने के लिए विशेष ‘प्रदूषण मुक्त घाट बनाने पर भी चर्चा हुई। ऐसी व्यवस्था की जा रही है जिससे धार्मिक भावनाएं भी आहत न हों और कचरा नदी के मुख्य प्रवाह में न मिल सके।











